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आदिकुंभस्थली सिमरिया में अर्धकुंभ का ध्वजारोहण

बिहार के बेगूसराय स्थित सिमरियाधाम में 19 अक्टूबर, 2023 को 12 वर्षों बाद फिर से अर्धकुंभ का ध्वजारोहण हुआ। पावन गंगा नदी के तट पर संत-महात्माओं की उपस्थिति में कुंभ पुनर्जागरण के प्रेरणा पुरुष करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने अर्धकुंभ का ध्वजारोहण किया‌। गंगा तट पर कुंभ ध्वज, इंद्र ध्वज, हनुमंत ध्वज और राष्ट्रीय ध्वज की विधि-विधान से मंत्रोच्चार के बीच स्थापना की गयी। इसके साथ ही अर्धकुंभ की शास्त्रीय विधि से शुरुआत हो गयी। अर्धकुंभ कार्तिक पूर्णिमा तक चलेगा। इस बीच तीन पर्व (शाही) स्नान और तीन परिक्रमा का विधान है।

कुरुक्षेत्र कुंभ कार्यक्रम

3 दिसंबर (उत्पन्ना एकादशी) कुंभ का शुभारंभ 4-5-6 दिसंबर शास्त्र मंथन (राष्ट्रीय संगोष्ठी)

कुरुक्षेत्र कुंभ प्रश्नोत्तरी- जिसे जानना आपके लिए है जरूरी

क्या किसी पंचांग में आया है कुरुक्षेत्र कुंभ का उल्लेख? मिथिला, वैदेही और सबसे प्रतिष्ठित दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय से निकलने वाले विश्वविद्यालय पंचांग में 12 कुंभों का उल्लेख आया है। क्या किसी प्रतिष्ठित विचारक, विद्वान या संस्था ने 12 स्थानों पर कुंभ की संस्तुति की ? ललित नारायण मिथिला विवि और कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि की विद्वत परिषद में इस पर गहन चर्चा और मंथन के बाद सभी विद्वानों ने इसकी सहर्ष संस्तुति की।

सिमरिया महाकुंभ दूसरा पर्व स्नान: देखिए फोटो

सिमरिया महाकुंभ का दूसरा पर्व स्नान ऐतिहासिक रूप से सफल रहा. अक्षय नवमीं का पावन दिन होने के कारण रात 12 बजे के बाद से ही लोगों ने मां गंगा में स्नान करना शुरू कर दिया. सिमरिया महाकुंभ पुनर्जागरण के प्रेरणा पुरुष करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज के साथ निकली शोभा यात्रा में ही लाखों लोग शामिल हुए. नागा संन्यासियों का करतब देखते बनता था. देखिए फोटो-

देखिए फोटो: सिमरिया महाकुंभ प्रथम शाही स्नान

सिमरिया महाकुंभ 2017 और प्रथम शाही स्नान से संबंधित फोटो-

मीडिया में सिमरिया महाकुंभ

सिमरिया महाकुंभ 2017 की खबरों पर एक नजर-

Loksabha TV Spl Prg Video: सिमरिया महाकुंभ- पुनर्जीवित होती एक परंपरा

देखिए सिमरिया महाकुंभ पर लोकसभा टीवी पर प्रसारित विशेष कार्यक्रम: सिमरिया महाकुंभ- पुनर्जीवित होती एक परंपरा का वीडियो-

सिमरिया महाकुंभ शास्त्र मंथन: राष्ट्रीय संगोष्ठी 22 अक्टूबर

बिहार की धरती ज्ञान की धरती रही है यह सर्वविदित है. यह धरती तीन मंथनों की भी धरती रही है. समुद्र मंथन के कारण सिमरिया आदि कुंभ स्थली मानी जाती है. कहते हैं प्रतापी राजा निमि का शरीर मजा गया तो विदेह जनक का जन्म हुआ और इसी कारण क्षेत्र का नाम पड़ा मिथिला. इनमें से तीसरा मंथन विशिष्ट है.

PICS: ध्वजारोहण और कुंभ क्षेत्र परिक्रमा

देखिए सिमरिया महाकुंभ 2017 के ध्वजारोहण और कुंभ क्षेत्र की पहली परिक्रमा की तस्वीरें-

सिमरिया महाकुंभ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिमरिया महाकुंभ के लिए शुभकामना संदेश देते हुए कहा कि मैं महाकुंभ के आयोजन से जुड़े सभी लोगों को इसके सफल और सुरक्षित आयोजन के लिए बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आप भी देखिए सिमरिया महाकुंभ के लिए प्रधानमंत्री मोदी का संदेश-

सिमरिया महाकुंभ 2017 में नागा साधु

महाकुंभ का एक बड़ा आकर्षण नागा साधु भी होते हैं. सामान्य दृष्टि में हम बस इन्हें वस्त्र धारण नहीं करने वाले भभूत लपेटे साधु समझते हैं. ये नागा साधु ऐतिहासिक भारतीय संस्कृति के कई रहस्यमय अध्यायों को अपने में समेटे हैं. संयम जिस युग का सबसे बड़ा संकट हो उस युग में इतना आत्म नियंत्रण किसी अचरज से कम नहीं. देश भर से ऐसे नागा साधुओं का सिमरिया धाम में जुटना प्रारंभ हो गया है. देखिए फोटो-

सिमरिया में हजार साल बाद बाद फिर से महाकुंभ शुरू, नीतीश ने किया उद्घाटन

बिहार की धरती 17 अक्तूबर को एक बार फिर महाकुंभ के पुनर्जागरण की ऐतिहासिक घटना की गवाह बनी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सिमरिया महाकुंभ पुनर्जागरण के प्रेरणा पुरुष करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज और देश भर के अखाड़ों और दूसरे तीर्थों से जुटे संत महात्माओं के आशीर्वाद के

सिमरिया महाकुंभ- 2017: देवी आज भी अवतार लेती हैं

देवी आज भी अवतार लेती हैं भारत दुनिया में अकेली सभ्यता है जिसने स्त्री को आदि शक्ति माना. बाहरी आक्रमणों और दूसरे प्रभावों के दबाव में भले ही कितना भी विचलन हुआ हो आज भी किसी घर की गृह स्वामिनी या मां का सम्मान किसी से भी अधिक होता है.

सिमरिया महाकुंभ 2017- धर्म ध्वजा

यह धर्म की ध्वजा है. धर्म वह तत्व है जो मनुष्य को पशुओं से श्रेष्ठ बनाता है. शास्त्र कहते हैं- आहार निद्रा भय मैथुनं च सामान्यमेतत् पशुभिर्नराणाम् । धर्मो हि तेषामधिको विशेष: धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः ॥

सिमरिया महाकुंभ कार्यक्रम 2017 का विस्तृत विवरण

आगम-निगम-पुराणोक्त तुलार्क महाकुंभ योग एवं पुनीत कार्तिक मास कल्पवास के पावन अवसर पर आध्यात्मिक उन्मेष के तात्त्विक अवबोध हेतु सर्वमंगला परिवार एवं संत समाज द्वारा शासन-प्रशासन के सहयोग से धार्मिक धरातल पर राष्ट्रीय एकता तथा सामाजिक समरसता में आबद्ध नैतिक उत्कर्ष एवं सुसमृद्ध सौम्य जीवन में सुशांति हेतु परम पूज्य गुरुदेव स्वामी जी के पावन सान्निध्य में निम्नांकित कार्यक्रम आयोजित हैं-

सिमरिया कुम्भ- आदि से अब तक

कलकल छलछल बहती गंगा सिर्फ नदी नहीं, भारत में गंगा मां है। वैज्ञानिक इसे समझ पाते और इतिहासकार शब्द दे पाते, इसके बहुत पहले से मां गंगा ने भारतीय  सभ्यता संस्कृति को पाला पोसा है. गंगोत्री ले लेकर गंगा सागर तक करोड़ों लोगों के विश्वास, आस्था और जीवन का प्रतीक है गंगा. जन्म से लेकर मरण तक हरेक भारतवासी के जीवन का अटूट हिस्सा है मां गंगा. इसकी एक बूंद मात्र जीवन को शुभ करने के लिए काफी है, शायद इसलिए इसे भारत की जीवन रेखा कहते है.

Photos: सिमरिया में समुद्र मंथन की प्रतिमा

अपनी जड़ों को ढूंढ़ने और उसे सींचने का साहस ही भारत को नित नूतन और चिर पुरातन बनाता है. ऐसी ही एक परंपरा की पुनर्प्रतिष्ठा का अभिनव अभियान मां गंगा के पावन तट पर बसे बिहार के छोटे से अंचल सिमरिया में हो रहा है. कहते हैं मिथिलांचल की धरती पर स्थित इसी सिमरिया में समुद्र मंथन से निकले

कैसे पहुंचे कुंभस्थली सिमरियाधाम ?

सिमरिया बिहार के बेगूसराय जिले में गंगा नदी के मनोरम तट पर स्थित है. बिहार की राजधानी पटना से दूरी- 70 किलोमीटर पटना से सड़क एवं रेल मार्ग दोनों से सुविधा उपलब्ध

मिथिलांचल में समुद्र मंथन

समय के प्रवाह में आप किसी सुरीले गीत के बोल भले ही भूल जाएं उसकी धुन मन में फिर भी बजती रहती है. ऐतिहासिक परंपराएं भी कुछ ऐसे ही प्रभाव लिए होती हैं. कालक्रम में वो भले उसी स्वरूप में न बनी रहे, लोक आस्था में अपना स्थान नहीं छोड़ती. मिथिलांचल के इलाके से समुद्र मंथन की कथा भी कुछ ऐसे ही जुड़ी है. सावन के महीने में मिथिलांचल में नवविवाहित स्त्रियां मधुश्रावणी का पर्व मनाती हैं.

आदि कुंभस्थली सिमरियाधाम में महाकुंभ 17 अक्तूबर से

मिथिला के सिमरियाधाम में इस साल कार्तिक मास महाकुंभ-2017 की शुरुआत 17 अक्तूबर से होगी। बिहार के बेगूसराय में सर्वमंगला विद्वत परिषद की ओर से आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी में इस पर फैसला किया गया। इस तीन दिवसीय संगोष्ठी में गोवा की राज्यपाल एवं मिथिला की बेटी महामहिम डॉ श्रीमती मृदुला सिन्हा, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी, द्वादश कुंभ पुनर्जागरण प्रेरणा पुरुष करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज, साधु समाज के संस्थापक