दशहरा यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व। हर साल विजयादशमी पर देशभर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। इस दौरान आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठता है और लोग भगवान श्रीराम की जय-जयकार करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रावण का पुतला जलाने के पीछे केवल एक पौराणिक घटना को याद करना ही उद्देश्य है, या इसका कोई गहरा आध्यात्मिक संदेश भी है?
हिंदू धर्म में 111 अंक का रहस्य: त्रिदेव, त्रिदेवी और तीनों लोकों से क्या है इसका संबंध? जानिए कन्या पूजन में 111 रुपये देने का महत्व
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, दान-दक्षिणा और शुभ कार्यों के दौरान 11, 51, 101 या 111 रुपये देने की परंपरा प्रचलित है। नवरात्रि में कन्या पूजन हो, विवाह समारोह हो या किसी नए काम की शुरुआत, कई परिवारों में शगुन के रूप में इन राशियों को शुभ माना जाता है। खासकर 111 रुपये देने की परंपरा को कुछ लोग धार्मिक आस्था, सकारात्मकता और समृद्धि की कामना से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 111 अंक का आध्यात्मिक महत्व क्या है? क्या इसका संबंध ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव से है? क्या यह महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के तीन स्वरूपों का प्रतीक है? क्या 111 का संबंध स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल जैसे तीन लोकों से भी जोड़ा जाता है? और आखिर शुभ अवसरों पर 100 रुपये की जगह 101 रुपये या 111 रुपये देने की परंपरा क्यों है? आइए, हिंदू धार्मिक मान्यताओं, सांस्कृतिक परंपराओं और अंक ज्योतिष की प्रचलित व्याख्याओं के आधार पर इन सवालों को विस्तार से समझते हैं। 111 अंक का क्या है आध्यात्मिक महत्व? अंक 111 को लेकर अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक व्याख्याएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे नई शुरुआत, एकत्व, सकारात्म...