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Showing posts with the label Jeevan Mantra

आभूषणों का शरीर के अंगों पर प्रभाव...

आभूषणों का शरीर के अंगों पर क्या प्रभाव पड़ता है? आभूषण पहनना शरीर के लिए क्यों फायदेमंद हैं? गहने क्यों पहनने चाहिए? जानने के लिए पढ़िए-

जनेऊ क्या है और इसकी क्या महत्वता है?

भए कुमार जबहिं सब भ्राता। दीन्ह जनेऊ गुरु पितु माता॥

उपभोक्तावाद की हकीकत

इन पांच लघु कहानी से समझे उपभोक्तावाद की हकीकत

हम तुलसी जी की पूजा क्यों करते हैं?

तुलसी जी , पौधा नहीं जीवन का अंग है। किस बातों का तुलसी पूजन में ध्यान रखा जाये?

देव पूजा नियम- आपके लिए जानना जरूरी है

जानिये कौन सी वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं हैं☘️

शिव रुद्राभिषेक का महत्व,शिव अभिषेक कैसे करे?

रुद्राभिषेक अर्थात रूद्र का अभिषेक करना यानि कि शिवलिंग पर रुद्रमंत्रों के द्वारा अभिषेक करना। जैसा की वेदों में वर्णित है शिव और रुद्र परस्पर एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। शिव को ही रुद्र कहा जाता है। क्योंकि- रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानि की भोले सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।

दिशाशूल क्या होता है ?

क्यों बड़े बुजुर्ग तिथि देख कर आने जाने की रोक टोक करते हैं ? आज की युवा पीढ़ी भले हि उन्हें आउटडेटेड कहे  दिशाशूल समझने से पहले हमें दस दिशाओं के विषय में ज्ञान होना आवश्यक है

भोजन से पहले और बाद जरूर बोलना चाहिए ये मंत्र

हम सभी को भोजन से पहले और भोजन के बाद ये मंत्र जरूर बोलना चाहिए।

🌷 गंगा जयंती महत्व 🌷

श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) महत्व- 🙏🏻 गंगा जयंती हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है | वैशाख शुक्ल सप्तमी के पावन दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई इस कारण इस पवित्र तिथि को गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है |

सनातन धर्म के बारे में ये जानकारी आपको जरूर होनी चाहिए...

यहां पर सनातन धर्म के बारे में बुनियादी जानकारी रख रहे हैं जो आपके लिए जानना जरूरी है...

प्रतिदिन स्मरण योग्य कल्याणकारी शुभ मंत्र

    🔹 प्रात: कर-दर्शनम्🔹 कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥          🔸पृथ्वी क्षमा प्रार्थना🔸

गायत्रीमन्त्राः सर्व गायत्री- 145 देवों के गायत्री मंत्र

सुखमय-शांतिमय जीवन के लिए प्रतिदिन 145 देवों के गायत्री मंत्र का जाप करें- 1 सूर्य ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥  2 ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात् ॥  3 ॐ प्रभाकराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥