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सिमरिया महाकुंभ शास्त्र मंथन: राष्ट्रीय संगोष्ठी 22 अक्टूबर

बिहार की धरती ज्ञान की धरती रही है यह सर्वविदित है. यह धरती तीन मंथनों की भी धरती रही है. समुद्र मंथन के कारण सिमरिया आदि कुंभ स्थली मानी जाती है. कहते हैं प्रतापी राजा निमि का शरीर मजा गया तो विदेह जनक का जन्म हुआ और इसी कारण क्षेत्र का नाम पड़ा मिथिला. इनमें से तीसरा मंथन विशिष्ट है.
यह है शास्त्र मंथन. इतिहास प्रमाण है कि जब वेदों पर प्रश्न किए जा रहे थे, मंत्रों को महत्वहीन बताया जा रहा था उस समय इसी बिहार की धरती से ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के मानस पुत्रों ने आगे बढ़कर मोर्चा लिया. वेदों के समर्थन में शास्त्र रचे और अनेक टीकाएं लिखीं. जिन षड दर्शनों को हम विशाल भारतीय ज्ञानपीठ का आधार मानते हैं उनमें में चार के प्रवर्तक बिहार की धरती से हुए. विचार-विनिमय, विरोध-समन्वय और तर्क-शास्त्रार्थ की जिस भारतीय परंपरा की विशिष्टता पूरी दुनियां में है बिहार उसकी प्रथम प्रयोग भूमि रही है. शास्त्र मंथन की यह परंपरा आज भी अविरल है.

राष्ट्रकवि दिनकर की जन्मभूमि सिमरिया धाम में लगे तुलार्क महाकुंभ 2017 के दौरान  22 अक्टूबर से 14 नवंबर के बीच ( त्यौहारों और पर्व स्नान को छोड़कर) देश-समाज से जुड़े अलग-अलग विषयों को लेकर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. इनमें देश भर से विद्वन, कलाकार, राजनेता हिस्सा लेंगे. आप सादर आमंत्रित हैं.

विषय : पत्रकारिता का सामाजिक दायित्व

दिनांक - 22 अक्टूबर, रविवार

समय - अपराह्न 3 से 5 बजे

उद्घाटनकर्ता एवं मुख्य अतिथि -श्रीमान विजय कुमार चौधरी, अध्यक्ष, बिहार विधान सभा

विषय प्रवर्तन- श्रीमान् राजीव तुली, प्रांत प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत

मुख्य वक्ता-
श्रीमान् अजीत अंजुम, वरिष्ठ पत्रकार

अध्यक्षता -श्रीमान् हितेश शंकर, संपादक, पांचजन्य

कार्यक्रम स्थल
सिमरिया कुंभ सेवा समिति मुख्य पंडाल

संपर्क -
99315 96111
9811077950
9650334142
94129 92244


 

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