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मिथिला में देवी का जन्म

मिथिला की भूमि जानकी की भूमि के नाम से तो प्रसिद्ध है ही, लेकिन यह भी जानना कम रोचक नहीं कि मिथिला भूमि में देवी ने तीन बार अवतार लिया.

मिथिला पेंटिंग में समुद्र मंथन

लोक परंपरा लोक कलाओं में जीवन पाती हैं. लोक कला की गोद में रहकर लोक-समाज के बीच हंसती, खेलती, मुस्कुराती हैं. लोक कला का एक रूप चित्रकारी है. देश के हर हिस्से में विशेष प्रकार की चित्रकला मिलती है. यह कला उस स्थान विशेष से जुड़ी सदियों की परंपरा को संजोने और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में सहज रूप से हस्तांतरित करने का काम भी करती हैं. चित्रों के माध्यम से घटनाओं, संदेशों और विचारों को समझना आसान भी होता है.

मिथिला में मधुश्रावणी

सावन के महीने में मिथिलांचल में नवविवाहित स्त्रियां मधुश्रावणी का पर्व मनाती हैं. विवाह के बाद पड़ने वाले पहले सावन में पति की लंबी आयु की कामना के लिए यह पर्व मनाया जाता है. यह भी जानना भी कम रोचक नहीं कि पुरोहिताइन व्रतियों को हर दिन एक कथा सुनाती हैं.

मिथिलांचल में समुद्र मंथन

समय के प्रवाह में आप किसी सुरीले गीत के बोल भले ही भूल जाएं उसकी धुन मन में फिर भी बजती रहती है. ऐतिहासिक परंपराएं भी कुछ ऐसे ही प्रभाव लिए होती हैं. कालक्रम में वो भले उसी स्वरूप में न बनी रहे, लोक आस्था में अपना स्थान नहीं छोड़ती. मिथिलांचल के इलाके से समुद्र मंथन की कथा भी कुछ ऐसे ही जुड़ी है. सावन के महीने में मिथिलांचल में नवविवाहित स्त्रियां मधुश्रावणी का पर्व मनाती हैं.