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सिमरिया महाकुंभ 2017- धर्म ध्वजा

यह धर्म की ध्वजा है. धर्म वह तत्व है जो मनुष्य को पशुओं से श्रेष्ठ बनाता है. शास्त्र कहते हैं-

आहार निद्रा भय मैथुनं च
सामान्यमेतत् पशुभिर्नराणाम् ।
धर्मो हि तेषामधिको विशेष:
धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः ॥

आहार, निद्रा, भय और मैथुन- ये तो इन्सान और पशु में समान है । इन्सान में विशेष केवल धर्म है, अर्थात् बिना धर्म के लोग पशुतुल्य है ।

धर्म को लेकर अधिक मत है, व्याख्या है लेकिन मनु स्मृति में जो परिभाषा है उसे लेकर कोई विरोध नहीं है. कहां गया-

धृति क्षमा दमोस्तेयं, शौचं इन्द्रियनिग्रहः।
धीर्विद्या सत्यं अक्रोधो, दसकं धर्म लक्षणम ॥

अर्थ - धर्म के दस लक्षण हैं - धैर्य, क्षमा, संयम, चोरी न करना, स्वच्छता, इन्द्रियों को वश मे रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना (अक्रोध)।

प्रश्र है कि इन बातों का समावेश मनुष्य में हो कैसे, कराएं कौन? भारत ने उसकी विधि खोजी थी. हजारों वर्षों तक यह समाज स्थिर रहा, श्रेष्ठ रहा, इतने शास्त्र रचे, महापुरुष दिए तो उसके पीछे एक पूरी व्यवस्था थी.

यह व्यवस्था थी आध्यात्म को प्रेरणा मानकर संपूर्ण समाज के लोक कल्याण हेतु एक साथ आने की. इस समागम के सूत्रधार होते थे तपस्वी साधक, श्रेष्ठ संत, ऋषि-मुनि-ज्ञानी. ऐसे साधु जिनके लिए कहा जाता है-

वृक्ष कबहू नहीं फल भखै
नदी न संचै नीर
परमार्थ के कारणे
साधु ने धरा शरीर

आधुनिक समय में तमाम विचलनों के बाद भी ऐसे श्रेष्ठ तपस्वियों से भारत की यह धरती आज भी संपन्न है. जब जब समाज को ऐसे धर्मरक्षकों की आवश्यकता होगी उनका आगमन होता रहेगा. ऐसे श्रेष्ठ संत समाज को एक करते रहेंगे.

सिमरिया महाकुंभ कुछ ऐसा ही आयोजन है. एक संत ने आह्वान किया है और समाज इक्ट्ठा हो गया है. धर्म की ध्वजा है और लोकहित का भाव है. उद्दात भाव से महान उद्देश्यों के लिए समाज का साथ आना सबसे बड़ा धर्म है. शास्त्र कहते हैं-

धर्मों रक्षति रक्षित:

अर्थात धर्म उसी की रक्षा करता है जो धर्म की रक्षा करता है. सिमरिया महाकुंभ धर्म के तत्व के विवेचन, उसकी रक्षा का समागम है. इस महान उत्सव में आप सभी का स्वागत है. समाज का धर्म समाज को साथ लेकर चलना है.

ऋग्वेद की ऋचा कहती है-

संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् |
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते ||

हम सब एक साथ चले; एक साथ बोले; हमारे मन एक हो |
प्रााचीन समय में देवताओं का ऐसा आचरण रहा इसी कारण वे वंदनीय है.

आइए सिमरिया महाकुंभ में. एक नया समाज बनाने, अपने समाज में नया आलोक भरने.





(लेख और फोटो श्याम किशोर सहाय जी के फेसबुक वॉल से)

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