सिमरिया महाकुंभ का दूसरा पर्व स्नान ऐतिहासिक रूप से सफल रहा. अक्षय नवमीं का पावन दिन होने के कारण रात 12 बजे के बाद से ही लोगों ने मां गंगा में स्नान करना शुरू कर दिया. सिमरिया महाकुंभ पुनर्जागरण के प्रेरणा पुरुष करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज के साथ निकली शोभा यात्रा में ही लाखों लोग शामिल हुए. नागा संन्यासियों का करतब देखते बनता था. देखिए फोटो-
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कलकल छलछल बहती गंगा सिर्फ नदी नहीं, भारत में गंगा मां है। वैज्ञानिक इसे समझ पाते और इतिहासकार शब्द दे पाते, इसके बहुत पहले से मां गंगा ने भारतीय सभ्यता संस्कृति को पाला पोसा है. गंगोत्री ले लेकर गंगा सागर तक करोड़ों लोगों के विश्वास, आस्था और जीवन का प्रतीक है गंगा. जन्म से लेकर मरण तक हरेक भारतवासी के जीवन का अटूट हिस्सा है मां गंगा. इसकी एक बूंद मात्र जीवन को शुभ करने के लिए काफी है, शायद इसलिए इसे भारत की जीवन रेखा कहते है.





















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