Skip to main content

मिथिला में मधुश्रावणी

सावन के महीने में मिथिलांचल में नवविवाहित स्त्रियां मधुश्रावणी का पर्व मनाती हैं. विवाह के बाद पड़ने वाले पहले सावन में पति की लंबी आयु की कामना के लिए यह पर्व मनाया जाता है. यह भी जानना भी कम रोचक नहीं कि पुरोहिताइन व्रतियों को हर दिन एक कथा सुनाती हैं.
इसमें पृथ्वी की उत्पत्ति की कथा होती है तो सती की भी, बिषहरी, विहुला और मनसा की कथा होती है तो मंगला गौरी की भी, लेकिन जो सबसे अचरच की बात है कि मिथिलांचल के क्षेत्र में मनाए जाने वाले इस पर्व में कथाओं के क्रम में एक दिन नवविवाहिताओं को समुद्र मंथन की कथा भी सुनायी जाती है.

भारतीय वांग्मय का एक प्रतिष्ठित ग्रंथ है रुद्रयामल तंत्र. उसमें स्वयं भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी पार्वती को समुद्र मंथन की कथा सुनाते हैं. इसे हम सुखद संयोग कहकर खारिज भी कर सकते हैं लेकिन इस क्षेत्र में हुए समुद्र मंथन के अन्य प्रमाणों के साथ जोड़कर देखें तो एक गहन विवेचना का विषय भी है.



 (फोटो सौजन्य)

Comments

Popular posts from this blog

सिमरिया कुम्भ- आदि से अब तक

कलकल छलछल बहती गंगा सिर्फ नदी नहीं, भारत में गंगा मां है। वैज्ञानिक इसे समझ पाते और इतिहासकार शब्द दे पाते, इसके बहुत पहले से मां गंगा ने भारतीय  सभ्यता संस्कृति को पाला पोसा है. गंगोत्री ले लेकर गंगा सागर तक करोड़ों लोगों के विश्वास, आस्था और जीवन का प्रतीक है गंगा. जन्म से लेकर मरण तक हरेक भारतवासी के जीवन का अटूट हिस्सा है मां गंगा. इसकी एक बूंद मात्र जीवन को शुभ करने के लिए काफी है, शायद इसलिए इसे भारत की जीवन रेखा कहते है.

समुद्र मंथन में मंदार पर्वत

कहा जाता है कि समुद्र मंथन में मंदार पर्वत को मथनी और बासुकीनाग को रस्सी बनाया गया था. यह प्रतीक भी हो सकते हैं और प्रत्यक्ष भी लेकिन यह सच है कि सिमरिया से मंदार पर्वत और बासुकीनाथ धाम की दूरी 200 किलोमीटर के आसपास की है. यह शोध और विवेचना का विषय है,

आभूषणों का शरीर के अंगों पर प्रभाव...

आभूषणों का शरीर के अंगों पर क्या प्रभाव पड़ता है? आभूषण पहनना शरीर के लिए क्यों फायदेमंद हैं? गहने क्यों पहनने चाहिए? जानने के लिए पढ़िए-