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आध्यात्मिक-सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुनीत पर्व कुरुक्षेत्र कुंभ का पुनर्जागरण


शास्त्रों में वर्णित द्वादश कुंभों में से सुप्त आठ कुंभों के पुनर्जागरण का पुनीत अभियान परम पूज्य करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज जी के सानिध्य में यज्ञ-हवन के साथ कुरुक्षेत्र कुंभ का शुभारंभ



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कलकल छलछल बहती गंगा सिर्फ नदी नहीं, भारत में गंगा मां है। वैज्ञानिक इसे समझ पाते और इतिहासकार शब्द दे पाते, इसके बहुत पहले से मां गंगा ने भारतीय  सभ्यता संस्कृति को पाला पोसा है. गंगोत्री ले लेकर गंगा सागर तक करोड़ों लोगों के विश्वास, आस्था और जीवन का प्रतीक है गंगा. जन्म से लेकर मरण तक हरेक भारतवासी के जीवन का अटूट हिस्सा है मां गंगा. इसकी एक बूंद मात्र जीवन को शुभ करने के लिए काफी है, शायद इसलिए इसे भारत की जीवन रेखा कहते है.

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