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यूट्यूब वीडियो 8- कुरुक्षेत्र कुम्भ: कुम्भ की परिकल्पना पर लोकसभा टीवी के सम्पादक

धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में एक बार फिर से कुंभ का आयोजन होने जा रहा है...अखिल भारतीय सर्वमंगला कुंभ सेवा समिति की ओर से जारी प्रयास के कारण कुरुक्षेत्र में करीब 11 सौ साल बाद पुन: महाकुंभ का स्नान किया जा सकेगा.. देखिए वीडियो-


कुरुक्षेत्र कुम्भ: कुम्भ की परिकल्पना पर लोकसभा टी वी के सम्पादक

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सिमरिया कुम्भ- आदि से अब तक

कलकल छलछल बहती गंगा सिर्फ नदी नहीं, भारत में गंगा मां है। वैज्ञानिक इसे समझ पाते और इतिहासकार शब्द दे पाते, इसके बहुत पहले से मां गंगा ने भारतीय  सभ्यता संस्कृति को पाला पोसा है. गंगोत्री ले लेकर गंगा सागर तक करोड़ों लोगों के विश्वास, आस्था और जीवन का प्रतीक है गंगा. जन्म से लेकर मरण तक हरेक भारतवासी के जीवन का अटूट हिस्सा है मां गंगा. इसकी एक बूंद मात्र जीवन को शुभ करने के लिए काफी है, शायद इसलिए इसे भारत की जीवन रेखा कहते है.

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आभूषणों का शरीर के अंगों पर क्या प्रभाव पड़ता है? आभूषण पहनना शरीर के लिए क्यों फायदेमंद हैं? गहने क्यों पहनने चाहिए? जानने के लिए पढ़िए-

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कहा जाता है कि समुद्र मंथन में मंदार पर्वत को मथनी और बासुकीनाग को रस्सी बनाया गया था. यह प्रतीक भी हो सकते हैं और प्रत्यक्ष भी लेकिन यह सच है कि सिमरिया से मंदार पर्वत और बासुकीनाथ धाम की दूरी 200 किलोमीटर के आसपास की है. यह शोध और विवेचना का विषय है,