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सिमरिया कुंभ मीडिया कवरेज

परम पूज्य करपात्री अग्निहोत्री स्वामी चिदात्म्नजी महाराज के नेतृत्व में सिमरिया में पुनः कुम्भ के आयोजन का संकल्प लिया गया है... उनके नेतृत्व में सिमरिया ने पहल कर दी है लुप्त हुई परम्पराओं को जीवित करने की... हिंदू समाज और देश के लिए ये बहुत जरूरी है की कुम्भ उन जगहों पर दोबारा लगे जहां वो वैदिक काल में लगता रहा है...
यहां हम आपके लिए सिमरिया कुंभ के बारे में विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में छपी खबरों के रख रहे हैं-












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सिमरिया कुम्भ- आदि से अब तक

कलकल छलछल बहती गंगा सिर्फ नदी नहीं, भारत में गंगा मां है। वैज्ञानिक इसे समझ पाते और इतिहासकार शब्द दे पाते, इसके बहुत पहले से मां गंगा ने भारतीय  सभ्यता संस्कृति को पाला पोसा है. गंगोत्री ले लेकर गंगा सागर तक करोड़ों लोगों के विश्वास, आस्था और जीवन का प्रतीक है गंगा. जन्म से लेकर मरण तक हरेक भारतवासी के जीवन का अटूट हिस्सा है मां गंगा. इसकी एक बूंद मात्र जीवन को शुभ करने के लिए काफी है, शायद इसलिए इसे भारत की जीवन रेखा कहते है.

आभूषणों का शरीर के अंगों पर प्रभाव...

आभूषणों का शरीर के अंगों पर क्या प्रभाव पड़ता है? आभूषण पहनना शरीर के लिए क्यों फायदेमंद हैं? गहने क्यों पहनने चाहिए? जानने के लिए पढ़िए-

समुद्र मंथन में मंदार पर्वत

कहा जाता है कि समुद्र मंथन में मंदार पर्वत को मथनी और बासुकीनाग को रस्सी बनाया गया था. यह प्रतीक भी हो सकते हैं और प्रत्यक्ष भी लेकिन यह सच है कि सिमरिया से मंदार पर्वत और बासुकीनाथ धाम की दूरी 200 किलोमीटर के आसपास की है. यह शोध और विवेचना का विषय है,